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रविवार, 25 अक्टूबर 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : वो मजदूरों का ख़ून पी रहे है

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : वो मजदूरों का ख़ून पी रहे है: हम ऐसे दौर में जी रहे हैं।  उल्लू हंस के ओंठ सी रहे है। ।  आप पसीने की बात करते हैं  वो मजदूरों का ख़ून पी रहे है  हेमराज हंस

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SATNA --22.01.2026