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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : मातु शारदे हे मातु शारदे सम्बल दे तै निर्बल छिनी म...

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : मातु शारदे हे मातु शारदे सम्बल दे तै निर्बल छिनी म...: मातु शारदे  हे मातु शारदे सम्बल दे तै निर्बल छिनी मनंगा का।  मोरे देस कै शान बढ़ै औ बाढ़ै मान तिरंगा का। ।  दिन दिन दूना होय देस मा ...

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर