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शुक्रवार, 29 मई 2015

भारत देस हमारै आय रहय का नहि आय बखरी। ।

बघेली कविता 

आजादी से अजुअव तक वइसै फटी ही कथरी। 
भारत देस हमारै  आय रहय का नहि आय बखरी। । 
देखा एक नजर जनतै पुन देखा आपन ठाठ। 
दस दस मोटर तोहरे दुअरा हमरे टुटही खाट। । 
कब तक हम अपना का ढोई लहकै लाग है कन्धा। 
तुहिन बताबा राजनीत अब सेवा आय कि धन्धा। । 
   क्रमशः ------------------------
हेमराज हंस ----9575287490  

बुधवार, 27 मई 2015

baghelikavita--कहिन नहा तुम दूध से दद्दी भईस दइन बे थन कै।

बघेली शेर 

कहिन नहा तुम दूध से दद्दी भईस  दइन बे थन कै। 
'मूड़े काही तेल नही औ  मनुस मुंगौरै ठनकै। । 
हेमराज हंस --9575287490 

कहां धरोगे ऎसे धन को जिसमें लगी हो आह।

दोहा 

कहां धरोगे ऎसे धन को जिसमें लगी हो आह। 
स्वयं ढूढ़ता वह चलने को घर में बारह राह। । 
हेमराज हंस --9575287490  

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : सूरज नेता विश्व का सबका पालनहार।

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : सूरज नेता विश्व का सबका पालनहार।: दोहा  सूरज नेता विश्व का सबका पालनहार।  मानसून हित तिप रहा करने को उपकार। ।  हेमराज हंस -9575287490

सूरज नेता विश्व का सबका पालनहार।

दोहा 

सूरज नेता विश्व का सबका पालनहार। 
मानसून हित तिप रहा करने को उपकार। । 
हेमराज हंस -9575287490 

hemraj hans ---जो राष्ट्रीय पहिचान म कहू ठे होत कबीर।

दोहा

दोहा

जो राष्ट्रीय पहिचान म कहू ठे होत कबीर। 
तब न होत घिनहा यतर धरम केर उपचीर। । 
हेमराज हंस --9575287490 

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : HEMRAH HANS-जैसे कोई पूंछ रहा हो 'भीमराव 'से जात। ...

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : HEMRAH HANS-जैसे कोई पूंछ रहा हो 'भीमराव 'से जात। ...: दोहा  जले घाव पर हो रहा मिर्ची का आघात।  जैसे कोई पूंछ रहा हो 'भीमराव 'से जात। ।  हेमराज हंस --9575287490 

HEMRAH HANS-जैसे कोई पूंछ रहा हो 'भीमराव 'से जात। ।

दोहा 

जले घाव पर हो रहा मिर्ची का आघात। 
जैसे कोई पूंछ रहा हो 'भीमराव 'से जात। । 
हेमराज हंस --9575287490 

रविवार, 24 मई 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल।

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल।: दोहा  खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल।  कूलर से बिजना कहिस जान्या हमरिव मोल। ।  हेमराज हंस

खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल।

दोहा 

खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल। 
कूलर से बिजना कहिस जान्या हमरिव मोल। । 
हेमराज हंस 

उनही हमरे गाँव मा कांटा लगा थें। ।

मुक्तक 

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जे राजधानी मा डांटा लगा थें। 
उनही हमरे गाँव मा कांटा लगा थें। । 
उई  विज्ञापन कै मलाई छान रहे है  
ता  गाँव के समाचार माठा लगा थें। । 
हेमराज हंस 

उनही हमरे गाँव मा कांटा लगा थें। ।

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जेखे पीठे म बजा बारां का घरियार। 
ओहिन की दारी सुरिज कढ़ई खूब अबिआर। … 

शनिवार, 23 मई 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli kavita नाती केर मोहगरी ''आजा'' जुगये आस कै...

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli kavita नाती केर मोहगरी ''आजा'' जुगये आस कै...: बघेली कविता  www.baghelisahitya.com --------------------------------------------------------------------------------------------- शहर ...

bagheli kavita नाती केर मोहगरी ''आजा'' जुगये आस कै बाती।

बघेली कविता www.baghelisahitya.com

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शहर मा  जाके रहय लाग जब से आपन गाँव। 
भरी दुपहरी आँधर होइगै लागड़ होइ गै छाँव। । 

 गाँवन कै इतिहास बन गईं अब पनघट कै गगरी। 
 थरी कोनइता मूसर ज्यतबा औ कांडी कै बगरी। । 
              गड़ा बरोठे किलबा सोचइ पारी आबै माव  । 

हसिया सोचै अब कब काटब हम चारा का ज्यांटा। 
सोधई दोहनिया मा नहि बाजै अब ता दूध का स्यांटा। । 
काकू डेरी माही पूंछै दूध दही का भाव। 

 दुर्घट भै बन बेर बिही औ जामुन पना अमावट। 
''राजनीत औ अपराधी ''अस सगली हाट मिलावट। ।
      हत्तियार  के  बेईमानी मा डगमग जीवन नाँव। 

जब से पक्छिमहाई बइहर गाँव मा दीन्हिस खउहर। 
उन्हा से ता बाप पूत तक करै फलाने जउहर। । 
नात परोसी हितुअन तक मां एकव नही लगाव।  

कहै जेठानी देउरानी के देख देख के ठाठ  । 
हम न करब गोबसहर गाँव मा तोहरे बइठै काठ। । 
हमू चलब अब रहब शहर मा करइ कुलाचन घाव। 

नाती केर मोहगरी ''आजा'' जुगये आस कै बाती। 
बीत रहीं गरमी कै छुट्टी  आयें न लड़िका नाती। ।    
खेर खूंट औ कुल देउतन का अब तक परा बधाव। 


ममता के ओरिया से टपकें अम्माँ केर तरइना। 
फून किहिन न फिर के झाँकिन दादू  बहू के धइन.। । 
यहै रंझ के बाढ़ मां हो थै लउलितियन का कटाव। 
शहर मा जाके ----------------------------------------
हेमराज हंस --9575287490   


















 

शहर मा जाके बसय लाग जब से आपन गाँव ----

कविता 

शहर   मा जाके बसय लाग जब से आपन गाँव  --------------------------------------------------
दुर्घट भै बन बेर बिही औ जामुन पना अमावट। 
राजनीत औ अपराधी अस सगली हाट  मिलावट। । 
बेईमानन के बेईमानी मा डगमग जीवन नाव। 
 

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर