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बुधवार, 27 मई 2015

hemraj hans ---जो राष्ट्रीय पहिचान म कहू ठे होत कबीर।

दोहा

दोहा

जो राष्ट्रीय पहिचान म कहू ठे होत कबीर। 
तब न होत घिनहा यतर धरम केर उपचीर। । 
हेमराज हंस --9575287490 

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर