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शनिवार, 16 मई 2015

भारत माता पाँव मा गुखरू बांधे बागा थी। ।

मुक्तक 

राजनीत पांव मा  घुंघरू बांधे बागा थी। 
भारत माता पाँव मा गुखरू बांधे बागा थी। । 
मँहगाई बजिंदा बोकइया कइ दीन्हिस 
गुंडई लंच का कुकड़ू कूं लये बागा थी। । 
हेमराज हंस  

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर