मुक्तक ---------------------------------
समाज मा दहेज़ कै भारी दुकान होथी।
नींद नही आबै जब बिटिया सयान होथी। ।
उई कहिन तै देस से कि भागवत सुनबाउब
हेन किसानन के घर मा गरुड़ पुरान होथी। ।
हेमराज हंस ----9575287490
-बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें