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रविवार, 16 अगस्त 2020

मैहर

जहा बिराजीं सारदा धन मैहर का भाग। 
बंदूखैं गउतीं हुंआ नल तरंग का राग।। 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर