यह ब्लॉग खोजें

शनिवार, 8 अगस्त 2020

बेल पत्र गंगा जली rimhi kavita hemraj hans

बेल पत्र गंगा जली चाउर चंदन रास। 
शंकर जी पूजैं लगा भारत सामन मास।। 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर