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शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2024

बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : तहिन रखइया लाज।

बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : तहिन रखइया लाज।: हे जग जननी शारदे, तहिन रखइया लाज।    तोरे क्वारा सकार हो, औ अंचरा मा सांझ ।।   हंस -भेड़ा  

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर