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सोमवार, 21 अक्टूबर 2024

तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है ----सबीना अदीव -कानपूर

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर