यह ब्लॉग खोजें

शनिवार, 12 अक्टूबर 2024

वह पारखी नजर तो फिर खराब कुछ नहीं -----गीतकार श्याम बिहारी वाजपेयी

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर