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बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

मैहर की इक शान थे विजयनारायण राय।

 

मैहर की इक शान थे विजयनारायण राय। 

जीवन में जाना नहीं अपना और पराय।। 


चाह सियासी मंच हो या साहित्य सोपान। 

अब तक मैहर ढ़ूढ़ता उन जैसा प्रतिमान।। 


है कृतज्ञ जिनका यहां पावन मैहर धाम। 

काल खण्ड में अमर है उनका सादर नाम।। 


जन नायक होते नही किसी जाति मे कैद।

वे बीमार समाज के हैं शुभ चिंतक वैद।। 

                    हेमराज हंस भेड़ा

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर