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बुधवार, 2 अक्टूबर 2024

तुम खेती मा लाभ का धन्धा बतामय आ गया।

 य  विपत  के  घरी  मा  तुमहूं  भजामैं  आ  गया। 

तलवार फरगत के जघा  पायल मजामै आ गया। । 

अबहिंन एक किसान कै लहास  उची  ही 

तुम खेती मा लाभ का धन्धा बतामय आ गया।

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर