BAGHELI SAHITYA ( बघेली साहित्य )
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सोमवार, 11 जनवरी 2016
बड्डे धन्ना सेठ।
बहुत बड़े धर्मात्मा बड्डे धन्ना सेठ।
पै ओखर नोकर रहैं बपुरे भूखे पेट।
।
हेमराज हंस
ठगी गै जनता खूब। हेमराज हंस
पिछले सत्तर साल से ठगी गै जनता खूब।
नेतन कै गोनियाँ लदी जंतै दोनियाँ दूब।
।
हेमराज हंस
bagheli जागा जनगण देव।
आरव मिला चुनाव का जागा जनगण देव।
राजनीत ख्यालैं लगी मेर मेर फउरेब।
।
हेमराज हंस
विंध्य का दक्खिन द्वार।।
कोऊ गाना गा रहा मारै कोऊ गोहार।
राजनीत मा रंजा है विंध्य का दक्खिन द्वार।
।
हेमराज हंस
रविवार, 10 जनवरी 2016
काल्ह मिला एक ठे मतदाता।
काल्ह मिला एक ठे मतदाता।
कहिस कि आय गें ज्वारैं नाता।
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अबै तक बुजबुजी नही चली।
अब बागै लागें गली गली।
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छोड़ के ए सी महल अटारी।
कुच्छ न पूछा हाल बिहारी।
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हेमराज हंस
bagheli doha ओखे जिव का ब्याध। ।
बिन गोनरी गगरी धरे रही प्यास का साध।
तोहरे निता श्रृंगार रस ओखे जिव का ब्याध।
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हेमराज हंस
शनिवार, 9 जनवरी 2016
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli doha
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli doha
: गाँव गाँव आमै लगा जबसे य अख़बार। मिर्रा तक जानैं लगा सब आपन अधिकार। । हेमराज हंस जय हिन्द
bagheli doha
गाँव
गाँव आमै
लगा जबसे य अख़बार।
मिर्रा तक जानैं लगा सब आपन अधिकार।
।
हेमराज हंस
जय हिन्द
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : दसइयां पिछ्ले चुनाव कै अद्धी गिनाउथै। । हेमराज हँ...
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : दसइयां पिछ्ले चुनाव कै अद्धी गिनाउथै। । हेमराज हँ...
: बघेली मुक्तक ------------------------------- कोऊ आपन उपलब्धी गिनाउथै। कोउ आपन राज गददी गिनाउथै। । रटे है वा मुख...
दसइयां पिछ्ले चुनाव कै अद्धी गिनाउथै। । हेमराज हँस
बघेली मुक्तक
-------------------------------
कोऊ आपन उपलब्धी गिनाउथै।
कोउ आपन राज गददी गिनाउथै।
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रटे है वा मुखागर की को को रात के आबा
दसइयां पिछ्ले चुनाव कै अद्धी गिनाउथै।
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हेमराज हँस
मंगलवार, 5 जनवरी 2016
BAGHELI-कब तक होई फुरा जमोखी। ।
केतू भाई अबै समोखी।
कब तक होई फुरा जमोखी।
।
उइं मारय हमरे जमान का
औ हम बुद्ध कै शिक्षा घोखी।
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हेमराज हंस
दोस्ती के नाम पे ग़द्दारी की है। ।
जब जब हमने यारी की है।
तो उसने मक्कारी की है।
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चाहे हो कारगिल य पठानकोट
दोस्ती के नाम पे ग़द्दारी की है।
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हेमराज हँस
रविवार, 3 जनवरी 2016
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज। ।
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज। ।
: आने वाली पीढ़ियाँ कर सकती हैं नाज़। दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज। । हेमराज हँस
दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज। ।
आने वाली पीढ़ियाँ कर सकती हैं नाज़।
दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज।
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हेमराज हँस
शुक्रवार, 1 जनवरी 2016
हम दयन नये साल कै बधाई। हेमराज हँस
हम दयन नये साल कै बधाई।
फलाने कहिन तोहई लाज नही आई।
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कुटिआ के खुंटिआ का कलेण्डर बदला है
पै अबहूँ धरी ही टुटही चार पाई।
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हेमराज हँस
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