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बुधवार, 22 जुलाई 2015

चपके रहा जोंक अस।


चपके रहा जोंक अस। 
कायर डरपोक अस। । 
कलिंग के शोक मा 
लगत्या है अशोक अस। । 
हेमराज हंस 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर