BAGHELI SAHITYA ( बघेली साहित्य )
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रविवार, 28 जून 2015
तोहरे प्रेम के चिन्हारी अस।
तोहरे
प्रेम के चिन्हारी अस।
गउद औ पइनारी अस। ।
सरा थी आंसू मा
जीवन के अमारी अस। ।
हेमराज हंस
मौन के पीड़ा की अनुभूति देखिये।
मौन के
पीड़ा की अनुभूति देखिये।
सदाचार का भ्रष्टो से सहानुभूति देखिये। ।
विश्वास आहत हो रहा है लोक तंत्र का
पदों औ क़दों की प्रतिभूति देखिये। ।
हेमराज हंस
hemraj hans वे दूध के धुले हैं।
वे दूध के धुले हैं।
रहस्य अभी खुले हैं। ।
ये स्थाई समस्या के
कुछ बुल बुले हैं। । ------हेमराजहंस
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli boliभरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli boliभरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।
: बघेली बोली भरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा। जइसा रीढ़ हीन का गरदा हेराय गा। । अब 'चाल चेहरा चरित्र 'कै चर्चा नही चलै घिनहा पा...
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli boli जब हवन कुण्ड मागय लगा पण्डित का बलिदा...
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli boli जब हवन कुण्ड मागय लगा पण्डित का बलिदा...
: जब हवन कुण्ड मागय लगा पण्डित का बलिदान। पूजा पत्री छोड़ के पेल भगें जजमान। । हेमराज हंस --9575287490
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : KAVI HEMRAJ HANS राजनीति में डिगरी की जरुरत नही ह...
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : KAVI HEMRAJ HANS राजनीति में डिगरी की जरुरत नही ह...
: राजनीति में डिगरी की जरुरत नही होती। जंगल में सिगड़ी की जरुरत नही होती।। हेमराज हंस 9575287490
bagheli boli जब हवन कुण्ड मागय लगा पण्डित का बलिदान।
जब हवन कुण्ड मागय लगा पण्डित का बलिदान।
पूजा पत्री छोड़ के पेल भगें जजमान। ।
हेमराज हंस --9575287490
शुक्रवार, 26 जून 2015
bagheli boliभरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।
बघेली बोली
भरे
आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।
जइसा रीढ़ हीन का गरदा हेराय गा। ।
अब 'चाल चेहरा चरित्र 'कै चर्चा नही चलै
घिनहा पानी निकरैं का नरदा हेराय गा। ।
हेमराज हंस > 9575287490
बुधवार, 24 जून 2015
मत कहो आकाश में कुहरा घना है।
यह किसी की व्यक्ति गत आलोचना है
संस्कार
कै हाट लगी है पै ही महग बाजार।
इहव सदी माही गरीब के पढ़य कै नहि आय तार
शुक्रवार, 19 जून 2015
KAVI HEMRAJ HANS राजनीति में डिगरी की जरुरत नही होती।
राजनीति में डिगरी की जरुरत नही होती।
जंगल में सिगड़ी की जरुरत नही होती।।
हेमराज हंस 9575287490
BAGHELI KAVITA विद्या के मंदिर मा बरती हई लछमी की बाती। कइसन देस या पढ़ी लिखी सरस्वतिव सकुचातीं। । हेमराज हंस
बघेली कविता
विद्या के मंदिर मा बरती हई लछमी की बाती।
कइसन देस या पढ़ी लिखी सरस्वतिव सकुचातीं। ।
हेमराज हंस
सोमवार, 8 जून 2015
बड़ी
भयंकर गरमी है।
ये कैसी बे शरमी हैं। ।
कागा से बोली गौरैया
तू तो बड़ा सत्कर्मी है। ।
हेमराज हंस
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli अम्मलक जना थै उनखे चाल से।
BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli अम्मलक जना थै उनखे चाल से।
: मुक्तक अम्मलक जना थै उनखे चाल से। हरिश्चंद समझौता है नटवर लाल से। । लबालब भरा है ता आज उई टर्रा थें सब गूलर भाग जई है सूख ताल...
bagheli अम्मलक जना थै उनखे चाल से।
मुक्तक
अम्मलक जना थै उनखे चाल से।
हरिश्चंद समझौता है नटवर लाल से। ।
लबालब भरा है ता आज उई टर्रा थें
सब गूलर भाग जई है सूख ताल से। ।
हेमराज हंस --9575287490
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