बघेली मुक्तक ------------------------------- कोऊ आपन उपलब्धी गिनाउथै। कोउ आपन राज गददी गिनाउथै। । रटे है वा मुखागर की को को रात के आबा दसइयां पिछ्ले चुनाव कै अद्धी गिनाउथै। । हेमराज हँस
दरबारन मा चर्चा ही कम्पूटर इंटरनेट के। खरिहनन मा मरै किसनमा फन्दा गरे लपेट के। । प्रेमचन्द के होरी का उइं उँगरी धरे बताउथें द्याखा भइलो ताज महल औ चित्र इंडिया गेट के । । हेमराज हंस
बघेली मुक्तक उइ कुरसी का खेल अक्कड़ बक्कड समझा थें। जनता का निगबर फक्कड़ समझा थें। । चले आउ थें बेशर्मी से बोतल लये बस्ती मा हमरे लोकतंत्र का पियक्कड़ समझा थें। । हेमराज हँस
बघेली मुक्तक देस टकटकी लगाये है काले धन के आस कै। अब 'बाबा जी 'बात करा थें चमनप्रास कै। । घुटकी भर खाय के दिल्ली डकारा थी देस का बताउथी महातिम उपास कै। । हेमराज हंस ---9575287490