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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

हम सरबरिया बाम्हन आह्यन

हम सरबरिया बाम्हन आह्यन 

हम सरबरिया  बाम्हन आह्यन मिलब साँझ के हाउली मा। 
मरजादा का माजब  धोऊब नरदा नाली        बाउली मा। । 
होन मेल     जोल भाई  चारा कै        साक्षात्  हिबै तस्बीर। http.//baghelisahitya.blogspot.com
नक्सल्बादी असम समिस्या औ नहि आय झंझट कश्मीर। । 
अगड़ा पिछड़ा आरछन का लफड़ा  बाला  नहि  आय  भेद। 
जात -पात अउ छुआछूत के ऊंच -नींच  के नहि आय खेद। । 
समता मिलै हँसत बोलत होन पैग भजिआ लपकाउरी मा। । 

एक नाव एक भाव मा बइठे   मिलिहै राजा रंक औ फक्कड़।
बड़े -बड़े परदूसन प्रेमी मिलिहै  सुलगाये  धुँआ औ धक्कड़। । 
रक्शा बाले  -नक्शा बाले   शिक्षा   स्वस्थ्य    सुरक्षा   बाले। 
बने  पुजारी   सरस्वती  के अद्धी   पउआ    बोतल   घाले। । 
बड़े शान से भाषन झारत  मद्ध निषेध  के रैली मा। । 

भले दये अदहन  चुलबा  मा  ताकै  टोरबन  कै  महतारी। 
औ हमार या अमल  सोबाबै रात के लड़का बिना बिआरी। । 
हमही चाही रोज साँझ के मुर्ग मुसल्लम पउआ अद्धी। 
शहर गॉव मा  लूट मार कई देइ ढ़ील कनून कै बद्दी। । 
हम बिन सून  ही राजनीत जस खरिहान कुरईली मा। । 

महुआ रानी पानी दय दय हमही बनै दिहिस लतखोर। 
पहलमान अस अकड़ रहे हन भले हबै अंतस कमजोर।।
बीस बेमारी  चढ़ी  है  तन  मा तउ नही या छूटै ट्याव। 
मदिरा तजा विक्ख की नाइ डिग्गी पीटा गांव -गांव। । 
नही  पी जयी  या  समाज  का बगाई कौरी कौरी मा। 
चला करी प्रण आइस  भाई कोउ जाय न हौली  मा। । 
 

                                                                               
       हेमराज     फलाने                                                                    
                                                                              
















गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

बघेली मुक्तक

बघेली मुक्तक 


हम जेहि मान्यन की बहुतै बिजार  है। 
लगथै   भाई  व  बरदा   गरिआर  है। । 
जब  उनसे पूंछ्यांन  ता कहाथें फलाने 
दहकी ता दहकी नही दल  का सिंगर है। । 


अब   सेंतै  लागै   माख  फलाने। 
हा तुमहिंन सबसे बांख फलाने। । 
तुहिन  लगाये   रह्या अदहरा 
तुहिन उचाबा राख फलाने। ।   


कवि -हेमराज त्रिपाठी ''फलाने ''
         भेड़ा मैहर मप्र 
9575287490 

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

BAGHELI SAHITYA: बघेली छन्द

BAGHELI SAHITYA: बघेली छन्द: बघेली  छन्द  उई कहाथें  देस से गरीबी हम भगाय देब , गरीबी या देस कै लुगाई आय नेता जी।  गरीबी भगाय के का खुदै तुम पेटागन मरिहै , व त...

बघेली छन्द

बघेली  छन्द 

उई कहाथें  देस से गरीबी हम भगाय देब ,

गरीबी या देस कै लुगाई आय नेता जी। 

गरीबी भगाय के का खुदै तुम पेटागन मरिहै ,

व तोहई पालै निता  बाप माई आय नेता जी। । 

गरीबी के पेंड़ का मँहगाई से तुम सींचे रहा ,

तोहरे निता कल्प वृक्ष नाई  आय नेता जी। । 

भाषण के अबीर से अस्वासन के कबीर से ,

तोहरे बोलिआय  का भउजाई आय नेता जी। । 



                                                                                   
                        हेमराज  त्रिपाठी                                                            
                    9575287490                                                                     


छन्द 

सोमवार, 26 जनवरी 2015

BAGHELI SAHITYA Blog Posts | Bagheli Profile Page | Hindi Blog aggregator and first hindi community website in india | BlogVarta.com

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बघेली कविता

बघेली कविता htpp;//baghelihemraj.blogspotbagheli sahitya

हमरे   घर   के    आगी   का
 बदला नाव बैसुन्दर होइगा। 
जे आने   का   हड़पिस  हीसा
 ओही आज भगन्दर होइगा। । 
लोभ दिहिन उई   बन के बदरी
 फसल जमी ता निचंदर होइगा। । 
बन गा   सोने   का   मृग मामा
 औ साधू   दसकंधर  होइगा। । 
पुन  के  छली   जई  अब वृंदा
 आतताई   जलंधर  होइगा। । 
चुहकै   लगे  ख़ून  जनता  का
 उनखर पेट सिकंदर होइगा। । 
जहा समाती है सब नदिया 
वाखर नाव समन्दर  होइगा 
                                        


हेमराज त्रिपाठी 

रविवार, 25 जनवरी 2015

मोदी जी चलवा रहें नशा मुक्ति अभियान। 

आधी रात तक अब खुली मदिरा केर दुकान। । 

गुरुवार, 22 जनवरी 2015


bagheli_hemraj@hotmail.com

मुक्तक 

माघ के ठाही  मा गरमी कहाँ से आय गै। 

सभ्भ घराना मा बेशर्मी कहाँ से आय गै। । 

कमल के तलवा मा बेसरम के फूल 

कड़क मिजाजी मा नरमी कहाँ से आय गै। । 

                                                                   
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                     हेमराज त्रिपाठी 

बुधवार, 21 जनवरी 2015

बघेली  कविता htpp;//baghelihemraj.blogspot.in

काल्ह मिला एक ठे प्रत्याशी। 
मिलनसार कर्मठ मृदु भाषी। । 
ईमानदार औ खूब जुझारू। 
पिये रहा घुटकी भर दारू। । 
छरकाहिल जे रहा काल्ह तक 
देखतै हमही सघराय लग। 
तन से मुरइला मन से नाग। । 
मुँह मा लये बिदुरखी बासी। 
काल्ह-----------------
व विकास कई करै न बात। 
लगा गिनामै जात औ पात। । 
बाम्हन ठाकुर काछी पटेल। 
राजनीत कस ख्यालै खेल। । 
पिछड़ा पन्द्रह और पचासी। 
काल्ह ------------------

 

bagheli sahity

मुक्तक 

आपन सहज बघेली आय। 
अवधी केर सहेली आय। । 
विंध्य हबै ज्याखर अहिवात 
ऋषि अगस्त्य कै चेली आय। । 
            २ 
उई शहीद का बताउथें कालरा मा  मरा है। 
उनखे शहादत मा का धरा है। । 
सामान मा  भें आंधर ता उनही  देखाथे 
हेन चारिव कई ती हरा भरा है। । htpp;//baghelihemraj.blogspot.com

मंगलवार, 20 जनवरी 2015

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BAGHELI SAHITYA: BAGHELI SAHITYA: bagheli_hemraj@hotmail.comबघेली म...: BAGHELI SAHITYA: bagheli_hemraj@hotmail.com बघेली मुक्तक काल्ह सड़क... : bagheli_hemraj@hotmail.com बघेली मुक्तक  काल्ह सड़क मा लगिगा ...

BAGHELI SAHITYA: bagheli_hemraj@hotmail.comबघेली मुक्तक काल्ह सड़क...

BAGHELI SAHITYA: bagheli_hemraj@hotmail.com बघेली मुक्तक काल्ह सड़क...: bagheli_hemraj@hotmail.com बघेली मुक्तक  काल्ह सड़क मा लगिगा जाम।  गऊ माता करती है आराम। ।  लगा थै दूध नही अब देतीं  ऐरा ढील दइ...
bagheli_hemraj@hotmail.com


बघेली मुक्तक 

काल्ह सड़क मा लगिगा जाम। 
गऊ माता करती है आराम। । 
लगा थै दूध नही अब देतीं 
ऐरा ढील दइन घनश्याम। । 

                                       
हेमराज त्रिपाठी 

रविवार, 18 जनवरी 2015

बघेली दोहा

बघेली दोहा 



चाहे हेन ज्याखर रहै सत्ता औ सरकार। 

कउन गडारी गाडरय नही बनाबै बार। । 

हेमराज हंस http;//baghelisahitya.com

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर