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गुरुवार, 22 जनवरी 2015

bagheli_hemraj@hotmail.com

मुक्तक 

माघ के ठाही  मा गरमी कहाँ से आय गै। 

सभ्भ घराना मा बेशर्मी कहाँ से आय गै। । 

कमल के तलवा मा बेसरम के फूल 

कड़क मिजाजी मा नरमी कहाँ से आय गै। । 

                                                                   
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                     हेमराज त्रिपाठी 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर