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गुरुवार, 8 जनवरी 2015

दोहा 

वर्दी हम दर्दी बनी पढ़ के जानयन बोर्ड। 
खीसा मा ही इन्ट्री सड़क मा ओभर लोड। । 

बिन नेतन के होय न एकठेव लिग्धा काम। 
धौ काहे     तब देस     मा नेता   हें बदनाम। । 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर