दोहा
वर्दी हम दर्दी बनी पढ़ के जानयन बोर्ड।
खीसा मा ही इन्ट्री सड़क मा ओभर लोड। ।
बिन नेतन के होय न एकठेव लिग्धा काम।
धौ काहे तब देस मा नेता हें बदनाम। ।
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
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