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रविवार, 18 जनवरी 2015

*साहित्य प्रेमी संघ*: केजरीवाल -३

*साहित्य प्रेमी संघ*: केजरीवाल -३:  केजरीवाल -३ तुम्हारे कान पर मफलर ,तुम्हारे हाथ में झाड़ू, समझ में ये नहीं आता ,तुम्हारी शक्सियत क्या है आदमी ,आम है सो आम है ,क्यों लिख्खा ट...

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर