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बुधवार, 14 जनवरी 2015

मुक्तक 

पुन के भाई सघरय लाग्या। htpp;//baghelihemraj.blogspot.com
दबी मुदी मा उघरय लाग्या। । 
छी द  परी  ता बधे रह्या 
उड़िला भा ता बगरय लाग्या। । 

हेमराज  त्रिपाठी 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर