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गुरुवार, 15 जनवरी 2015

BAGHELI SAHITYA: दोहा राजनीत धंधा बनी अख़बार बना उद्योग। हमरे भारत ...

BAGHELI SAHITYA: दोहा  राजनीत धंधा बनी अख़बार बना उद्योग। हमरे भारत ...: दोहा  राजनीत धंधा बनी अख़बार बना उद्योग।  हमरे भारत देस का कइसन  हबई कुजोग। ।                                           हेमरा...

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर