यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 15 जनवरी 2015

दोहा 


राजनीत धंधा बनी अख़बार बना उद्योग। 
हमरे भारत देस का कइसन  हबई कुजोग। । 
                                      


  हेमराज त्रिपाठी htpp;//baghelihemrajblogspot.com

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर