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कइसन चलै गिरस्ती मामा।
उतर गै सगली मस्ती मामा। ।
परछांई जब बढ़ई लाग् ता
समुझा दिन कइ अस्ती मामा। ।
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
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