मुक्तक
उनखे गम्मदारी मा गरमी कहाँ से आय गै।
सभ्भ घराना मा बेसरमी कहाँ से आय गै। ।
कमल के तलबा मा बेसरम के फूल ,
कड़क मिजाजी मा नरमी कहाँ से आय गै। ।
हेमराज
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें