यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 24 मार्च 2015

वा पुरखन कै थाती ,धन्नासेठ का कउरा न होय। ।

बघेली मुक्तक 

भुँइ   हमार  मंदिर आय  , भूत का चउरा न होय। 
वा पुरखन कै थाती  ,धन्नासेठ का कउरा न होय। । 
किसानन    का   धरती   माता   से  कम    नही, 
लीलारे का चन्दन आय देंह का खउरा न होय। ।  

                                             हेमराज 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर