मुक्तक
वे उनकी देश भक्ति को ?सलाम करते है।
जो गद्दारों की रिहाई खुले आम करते हैं। ।
घाटी में सिसकता है बलिदानियों का खून
ये वतन परस्ती को नीलाम करते है। ।
हेमराज हंस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
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