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रविवार, 1 नवंबर 2015

देवारी के पिआए पड़बा नही मोटाय।

देवारी के पिआए पड़बा नही मोटाय। 
एक रोज के पानी से कड़बा नही मोटाय।।

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर