यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

दादू भांगर भइला होइ गा।

   दादू भांगर भइला होइ गा। 

उज्जर तक मटमइला होइ गा। 
                               
हम जेही बज्जुर का मान्यन 
फाट  के चइला चइला गा। । 
हेमराज हंस      

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर