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मंगलवार, 17 नवंबर 2015

पुलिस जाना थी जेबकतरा आय।

पुलिस जाना थी जेबकतरा आय। 
हमरे समाज का खतरा आय। । 
तउ सलामी ठोक रही ही 
वा  राजनीत का रकरा आय। । 
हेमराज हंस 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर