BAGHELI SAHITYA ( बघेली साहित्य )
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शनिवार, 4 अप्रैल 2015
मुक्तक
चउआन
हेमै ''जगनिक '' के आल्हा।
दंगा मा पकड़ गें सय्यद ताला। ।
अब नम्बर रसखान का है
देस भक्त से पर गा पाला। ।
हेमराज हंस
घर बरिगा ता बरिगा हम दमकल ता देख्यन।।
मुक्तक
पिआसा परा हम हेन नल का देख्यन।
ऊसर मा बाइत करत हल का देख्यन। ।
आगी लगाय के अब कहा थें फलाने
घर बरिगा ता बरिगा हम दमकल ता देख्यन।।
हेमराज हंस
जे आँधर बरदा बेँच दिहिन काजर आंज के। ।
मुक्तक
''नल तरंग''बजाउ थें बजबइया झांझ के।
देस भक्ति चढ़ा थी फलाने का साँझ के। ।
उनही ईमानदार कै उपाधि दीन गै
जे आँधर बरदा बेँच दिहिन काजर आंज के। ।
हेमराज हंस
सोमवार, 30 मार्च 2015
पता चला तार मा कटिआ फसाउथें। ।
मुक्तक
उई अच्छे दिन का घटिआ बताउथें।
बुलन्द दरबाजा का टटिआ बताउथें। ।
जे बात करत रहें हैलोजन के अजोर कै ,
पता चला तार मा कटिआ फसाउथें। ।
हेमराज हंस
गुरुवार, 26 मार्च 2015
गाँव गाँव मा जबा देबारे
गाँव गाँव मा जबा देबारे
गाँव -गाँव मा जबा देबारे पंडा दे थें हूम।
लोक धरम कै चैत मा चारिव कईतीधूम। ।
आठैं अठमाइन चढ़ै खेर खूंट का भोग।
जलसा का कलसा धरे ''राम जनम का जोग ''। ।
बाना खप्पड़ कालका जबा देवारे हांक।
बिन प्रचार के चल रही लोक धर्म कै धाक। ।
हेमराज हंस
भारत रत्न अटल जी
भारत रत्न अटल जी
हे'' भारत रत्न'' भया सम्मानित पाके अटल बिहारी का।
जुग गायी तोहार गुन गाथा हाथे धरे चिन्हारी का। ।
लोकतंत्र का मंदिर तक अपने मूरत से कहय लाग ,
देखा अपने अंतस का पुन देखा अटलबिहारी का। ।
हेमराज हंस
बुधवार, 25 मार्च 2015
बघेली मुक्तक
सत्ता कबहू गभुआर नही होय।
जइसा पूर सत्त अख़बार नही होय। ।
सरमन सब दिन मारे गे हें शब्द
BAGHELI POEM
मुक्तक
उनखे गम्मदारी मा गरमी कहाँ से आय गै।
सभ्भ घराना मा बेसरमी कहाँ से आय गै। ।
कमल के तलबा मा बेसरम के फूल ,
कड़क मिजाजी मा नरमी कहाँ से आय गै। ।
हेमराज
मंगलवार, 24 मार्च 2015
नंगई से नही बड़प्पन से नापा।
बघेली मुक्तक
नंगई से नही बड़प्पन से नापा।
तुंहु अपने सीना का छप्पन से नापा। ।
देस देखे बइठ है ''नहुष '' के अच्छे दिन
पै वाखर या अर्थ नही तुम बाल्मीक का वीरप्पन से नापा। ।
हेमराज
वा पुरखन कै थाती ,धन्नासेठ का कउरा न होय। ।
बघेली मुक्तक
भुँइ हमार मंदिर आय , भूत का चउरा न होय।
वा पुरखन कै थाती ,धन्नासेठ का कउरा न होय। ।
किसानन का धरती माता से कम नही,
लीलारे का चन्दन आय देंह का खउरा न होय। ।
हेमराज
मंगलवार, 17 मार्च 2015
हाय !!दइव !या का किहा कहि के गिरा किसान। ।
दोहा
पाथर परिगा फसल मा अब भा मरे बिहान।
हाय !!दइव !या का किहा कहि के गिरा किसान। ।
करहा आमा नीझरि गा ठूठ ठाढ़ मउहार।
चौपट होइ गै फसल सब अइसा मारिस वार। ।
टप टप
अँसुआ बहि रहें खेतिहर परा सिकिस्त।
खाद बीज का ऋण चढ़ा औ टेक्टर कै क़िस्त। ।
हेमराज
http;//baghelisahitya
रविवार, 15 मार्च 2015
को अब सुनय गोहर। ।
ऊपर
ता दाऊ आय रूठा है
औ नीचे दरवार।
धरती पुत्र अन्नदाता कै
को अब सुनय गोहर। ।
हेमराज
http;//baghelisahitya.com
गुरुवार, 12 मार्च 2015
बघेली क्षणिका
बघेली क्षणिका
सत्ता
साहित्य से सब दिन अकड़ा रहा है।
एहिन से उनखर छत्तीस का आकड़ा रहा है.। ।
हेमराज
बड़े ललत्ता हया फलाने।
मुक्तक
बड़े ललत्ता हया फलाने।
तास के पत्ता हया फलाने। ।
हम तोहइ साहित्य मान्यन तै
पै तुम सत्ता हया फलाने। ।
हेमराज
समय काहू का सगहा नही भा। ।
मुक्तक
करिआरी अस पगहा नही भा।
फ़ौज मा भर्ती रोगहा नही भा। ।
उनसे जाके कहि द्या भूभुर न करै
समय काहू का सगहा नही भा। ।
हेमराज
http;//baghelisahitya
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