मुक्तक
पिआसा परा हम हेन नल का देख्यन।
ऊसर मा बाइत करत हल का देख्यन। ।
आगी लगाय के अब कहा थें फलाने
घर बरिगा ता बरिगा हम दमकल ता देख्यन।।
हेमराज हंस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
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