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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

पढ़इया स्कूल छूरा लइके आउ थें।

मुक्तक 

पढ़इया स्कूल  छूरा लइके आउ थें। 
हम उनसे पूंछ्यन  ता कारन बताऊ थें। । 
पढ़ाई के साथ साथ सुरक्षव  जरुरी है 
आज काल्ह सर जी पी के पढ़ाउ  थें। । 
        हेमराज हंस  

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर