मुक्तक
पढ़इया स्कूल छूरा लइके आउ थें।
हम उनसे पूंछ्यन ता कारन बताऊ थें। ।
पढ़ाई के साथ साथ सुरक्षव जरुरी है
आज काल्ह सर जी पी के पढ़ाउ थें। ।
हेमराज हंस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
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