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रविवार, 29 नवंबर 2015

हम जानी थे उइ भण्डा सराध करय आये हें।

हम जानी  थे उइ भण्डा सराध करय आये हें। 
आँधियार सुरिज कै सराध करय आये हें।
एक बेर ठगा गा विंध्य ता निहुरा है झुकेही मा 
उइ पुनि के ''अगस्त''अस अपराध करय आये हें। 
हेमराज हंस ===9575287490 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर