मुक्तक
अनमन अनमन सयान बइठ हे।
टन मन पीरा के बयान बइठ हे। ।
दोउ जून जुड़े जिव रोटी नही मिलै
आंसू पी पी के अघान बइठ हे। ।
हेमराज हंस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
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