यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

हमरेन लगिगा हरिजन एक्ट। ।

मुक्तक 

काल्ह बतामै गंगा भटट। 
मचा साँझ के लठ्ठम लठ्ठ। । 
हम होन गयन करय समझौता 
हमरेन लगिगा हरिजन एक्ट। । 
 हेमराज हंस 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर